जहां वर्षों तक देश ने तिरपाल के नीचे रामलीला को देखा, आज वहां 400 गुड़े 300 वर्ग फीट की 12 से 14 मीटर ऊंची शिला दिख रही है। बारिश की बूंदों से फटिक सिला की चमक रही यह चट्टान वनवासी राम का आसन है, तो वही अवधपुरी की दिवाली का पर्याय भी। यह सदियों से प्रतीक्षित राम मंदिर की नींव है, जो साकार होने के साथ भव्य राम मंदिर के आकार का एहसास करा रहे हैं।

Ram mandir construction

ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय संग गुरुवार को यहां पहुंचे मीडिया कर्मियों को नींव में ही भव्य मंदिर का एहसास सम्मोहित कर देता है। मिनट भर के सन्नाटे के बाद इसे एकटक निहारने का क्रम तय टूटता है, जब चपतराय आवाज देते हैं। वह बताते हैं कि अभी यह नींव आगे के निर्माण के लिए तैयार नहीं हुई है।

विशाल चट्टान रूपी नींव को अगले दो से तीन दिनों में अंतिम स्पर् दिए जाने के बाद उसके ऊपर 1.5 मीटर ऊंची कंक्रीट की एक और परत चढ़ाई जानी है। इस तरह सतह 16 फीट मोटी होगी और इसे मिरजापुर तथा बंसीपहाड़पुर (भरतपुर ,राजस्थान) की शीला पट्टीकाओं के साथ संगमरमर से तैयार होना है।

नींव के लिए झील के आकार में खोजी गई भूमि के कुछ ही फासले पर प्लिंथ में लगाने के लिए लाई गई शीला पट्टिकाएं छोटे से पहाड़ की आकृति में धरी दिखती है, तो विस्तृत चट्टान रूपी नींव के एक हिस्से पर लहराता भगवा ध्वज सनातन संस्कृति के गौरवबोध से भर देता है, जहां 5 सितंबर 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूमि पूजन किया था, यह वही जगह है।

Ram mandir temple

चंपतराय बताते हैं कि मंदिर निर्माण के बाद दिसंबर 2023 तक यहां बने गर्भगृह में रामलला का दर्शन हो, इसके लिए युद्धस्तर 24 घंटे काम जारी है।

निर्माण कार्य की प्रगति से रूबरू कराने आए चंपत राय वाणी को विराम देते हैं तो वहां मौजूद ट्रस्ट के सदस्य एवं नीमोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्रदास, विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा आदि गर्वित भाव से निर्माण की भव्यता से जुड़ी चीजें बताने लगते हैं।

🔘 360 फीट लंबा, 235 फीट चौड़ा एवं 161 फीट ऊंचा मंदिर।
🔘 160 स्तंभ भूतल, 132 प्रथम तल एवं 74 द्वितीय तल में होंगे। 🔘 एक मुख्य शिखर सहित पांच उप शिखर एवं इतने मंडप बनेंगे।
🔘 12 प्रवेश द्वार बयां करेंगे रामलला के दिव्य राममंदिर की भव्यता।
🔘 2.75 एकड़ में अकेले मंदिर तथा संपूर्ण परकोटा 6.5 एकड़ का होगा।