अफगानिस्तान से लगभग 21000 करोड रुपए की रिकॉर्ड ड्रग्स तस्करी के रैकेट के पर्दाफाश के बाद देश की तमाम एजेंसियां इसके तह तक पहुंचने में जुट गई है। राजस्व खुफिया महानिदेशालय (डीआरआई, DRI) के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मामले की जांच शुरू कर दी है

Afghanistan drug case

डीआरआई के अनुसार करीब 3000 किलोग्राम हेरोइन की यह खेप 15 अगस्त को काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान से ईरान भेजी गई थी। ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार दो अफ़गानियो से डीआरआई के अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं।

डीआरआई के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, गुजरात के मुद्रा पोस्ट से 3000 किलोग्राम हीरोइन की जब्ती के पहले भी भारी मात्रा में इस मादक पदार्थ की तस्करी के संकेत मिलते रहे हैं। आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा के पते पर पंजीकृत जीस आशी ट्रेडिंग कंपनी के नाम से टेलकम पाउडर की आड़ में हेरोइन की या बड़ी खेप भेजी गई थी।

उसके नाम पर जून में भी 25000 किलोग्राम टेलकम पाउडर का आयात किया गया था। माना जा रहा है कि जून में आया टेलकम पाउडर भी हेरोइन ही था, जिसकी कीमत 70000 करोड रुपए से अधिक है।

डीआरआई ने कंपनी के कथित संचालक एम. सुधाकर वाह उनकी पत्नी जीडीपी वैशाली को चेन्नई से गिरफ्तार कर भुज की विशेष अदालत में पेश किया। कोर्ट ने दोनों को 10 दिनों की डीआरआई हिरासत में भेज दिया है।

सूत्रों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर अफगानिस्तान से हेरोइन की तस्करी सिर्फ चंद लोगों का काम नहीं हो सकता है। इसे लाने और खपाने में बड़े रैकेट का हाथ होना सुनिश्चित है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस रैकेट की सभी कड़ियों को बेनकाब करना जांच का मुख्य उद्देश्य है।

माना जा रहा है कि अफगानिस्तान तक काली कमाई का हिस्सा पहुंचाने के लिए आशी ट्रेडिंग की तरह अन्य छह कंपनियों या हवाला को इस्तेमाल किया जाता होगा।

डीआरआई के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार अफगानी और अन्य आरोपितों से पूछताछ में अहम जानकारियां मिली है।